भगवान शिव ने पार्वती जी की मगरमच्छ बनकर, क्यों ली परीक्षा. जानिए पौराणिक कथा Bhagwat Geeta Saar l Shri Krishna Vani भगवत गीता उपदेश सार
भगवान शिव ने पार्वती जी की मगरमच्छ बनकर, क्यों ली परीक्षा. जानिए पौराणिक कथा
भगवान भोलेनाथ को इस समस्त सृष्टि का रचियता माना जाता है. उनका आदि है ना ही अंत है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव का विवाह पार्वती जी के साथ हुआ था. इस विवाह के लिए, पार्वती जी को सैकड़ों वर्षों तक कठोर तपस्या भी करनी पड़ी थी. हिंदू धर्म में सोमवार के दिन का बेहद महत्व माना जाता है. सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है. जो भी व्यक्ति सोमवार के दिन विधि विधान से शिवजी का पूजन और आराधना करता है. उसके जीवन के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं. इसके साथ ही जीवन में सुख एवं समृद्धि का वास हो जाता है. भगवान भोलेनाथ को बेहद जल्दी प्रसन्न होने वाला देवता भी माना जाता है. भोलेनाथ का विवाह पार्वती जी के साथ हुआ था. इसके लिए पार्वती जी ने सैंकड़ों वर्षों तक कठिन तप किया था. तप के बाद, एक वक्त ऐसा भी आया था, जब पार्वती जी को भगवान शिव की परीक्षा का सामना करना पड़ा था. आइए जानते हैं ये पौराणिक कथा. तो मित्रों नमस्कार औऱ स्वागत है आप सभी का, एक बार फिर धर्म रक्षा पर. Video शुरू करणेसे पहिले हम बताना चाहते हैं की, video लास्ट तक जरूर देखे. औंर आप हमारे channel पे नये हो तो like, कमेंट औंर subscribe जरूर करे
तो चलिए जानते है की, शिव जी ने कीस तरह से ली परीक्षा. पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को, अपने पति के रूप में पाने के लिए, सैकड़ों वर्षों तक कठोर तप किया था. उनकी तपस्या को देखकर देवताओं ने, शिवजी से देवी पार्वती की मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना की थी. इसके बाद भोलेनाथ ने, सप्तर्षियों को पार्वती जी की परीक्षा लेने के लिए भेजा. इस परीक्षा के दौरान, सप्तर्षियों ने शिवजी के ढेरों अवगुणों को बताते हुए, माता पार्वती से शिव जी से विवाह न करने का कहा. लेकिन पार्वती जी अपने निर्णय से टस से मस नहीं हुईं. इस पर खुद भोलेनाथ ने माता पार्वती की परीक्षा लेने का निर्णय लिया. माता पार्वती के तप से प्रसन्न होकर, शंकर जी उनके सामने प्रकट हुए. और उन्हें वरदान देकर अंतर्ध्यान हो गए. कुछ क्षणों बाद ही एक मगरमच्छ ने एक लड़के को पकड़ लिया. और लड़का मदद के लिए पुकारने लगा. बच्चे की आवाज सुनकर, पार्वती जी नदी किनारे पहुंची. और उनका मन द्रवित हो गया. इस बीच लड़के ने माता पार्वती को देखकर, कहा कि मेरी न मां है न बाप, न कोई मित्र ही है. माता आप ही मेरी रक्षा करें.
इस पर पार्वती जी ने मगरमच्छ से कहा, कि ग्राह इस लड़के को छोड़ दें. इस पर मगरमच्छ ने कहा, कि दिन के छठे पहर जो मुझे मिलता है, उसे आहार बनाना मेरा नियम है. पार्वती जी के विनती करने पर मगरमच्छ ने लड़के को छोड़ने के बदले मे, पार्वती जी के तप से प्राप्त वरदान का पुण्य फल मांग लिया. इस पर पार्वती जी तैयार हो गईं. मगरमच्छ ने बालक को छोड़ दिया, और तेजस्वी बन गया. अपने तप का फल दान करने के बाद, पार्वती जी ने बालक को बचा लिया. और एक बार फिर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए तप करने बैठ गईं. इस पर भोलेनाथ दोबारा प्रकट हुए. और पूछा कि तुम अब क्यों तप कर रही हो, मैंने तम्हें पहले ही मनमांगा दान दे दिया है. इस पर पार्वती जी ने, अपने तप का फल दान करने की बात कही. इस पर शिवजी प्रसन्न होकर बोले, मगरमच्छ और लड़के दोनों के स्वरूप में मैं ही था. मैं तुम्हारी परीक्षा ले रहा था, कि तुम्हारा चित्त प्राणिमात्र में अपने सुख दुख का अनुभव करता है, या नहीं. तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए ही, मैंने ये लीला रचाई थी. अनेको रूप में दिखने वाला मैं ही एक सत्य हूं. अनेक शरीरों में नजर आने वाला मैं निर्विकार हूं. इस तरह पार्वती जी शिव जी की परीक्षा में उत्तीर्ण हुई और उनकी अर्धांगिनी बनी. दोस्तों, उम्मीद करता हूं , आपको video पसंद आया होगा. औंर आप हमारे channel पे नये हो तो like, कमेंट औंर subscribe जरूर करे आपके एक like से ही, हम मोटिवेट होते है , औंर हमे प्रेरणा मिलती है. इसी के साथ अब मुझे इजाजत दे, मैं फिर लौटूंगा ऐसी ही कुछ और धार्मिक जानकारियों के साथ. तबतक के लिए अपना और अपने चाहने वालों का ख्याल रखे. धन्यवाद.

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