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सपने में शारीरिक संबंध बनाते हुये देखने का क्या अर्थ हैं ?

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नमस्कार दर्शकों, धर्म रक्षा channel पर आप सभी का तहे दिल से स्वागत है। दर्शकों, आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं, जिसके बारे में लोग अक्सर सोचते हैं लेकिन खुलकर बात नहीं करते। वह है सपना, जिसमें इंसान खुद को संभोग करते हुए देखता है। बहुत से लोग ऐसे सपनों के बाद डर जाते हैं। कुछ लोग इसे पाप समझते हैं। तो कुछ लोग इसे केवल कल्पना मानकर टाल देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि, ऐसे सपनों के पीछे गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य छुपा है। आज हम इसी रहस्य को समझने का प्रयास करेंगे। तो दर्शकों, video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुने और सच्चे दिल से कमेंट में जय श्री कृष्ण जरूर लिखे। दर्शकों, सबसे पहले समझते हैं कि सपने क्या होते हैं। भारतीय शास्त्रों के अनुसार सपना केवल नींद का खेल नहीं है। यह हमारे मन के गहरे स्तरों से जुड़ा अनुभव है। स्वप्नों को तीन प्रकार में बांटा गया है। पहला है दिव्य स्वप्न। दूसरा है सांसारिक या साधारण स्वप्न। और तीसरा है विकारी स्वप्न। दिव्य स्वप्न में हमें ईश्वर या देवता के दर्शन हो सकते हैं। साधारण स्वप्न में हम दिनभर की घटनाओं को दोबारा देख सकते हैं। और विकारी ...

संध्या के समय घर की चौखट पर क्यों नहीं बैठना चाहिए।

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नमस्कार दोस्तों, संध्या के समय घर की चौखट पर क्यों नहीं बैठना चाहिए। वास्तु अनुसार घर में कितने फोटो फ्रेम लगाने चाहिए। घर में हर एक वस्तु का नाता वास्तु से बताया गया है। घर की सीढ़ियों के नीचे रसोई होना शुभ है या अशुभ। ये सभी सवालों का जवाब आपको इसी video मे मिलनेवाला है। तो दोस्तों video सुरु करनेसे पहले सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। घर में अक्सर बड़े बुजुर्ग, घर की चौखट पर खड़ा होने से मना करते हैं, लेकिन इसकी पौराणिक मान्यता क्या है। इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।  दोस्तों, वास्तु शास्त्र में घर के लिए कई नियम बताए गए हैं। जिनका पालन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर समय रहते नियमों का पालन न किया गया, तो व्यक्ति को वास्तुदोष का सामना करना पड़ सकता है। वहीं आपने घर के बड़े बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि, संध्या के समय घर की चौखट पर नहीं बैठना चाहिए। आखिर ऐसा क्यों कहा जाता है। इसके बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं। संध्या के समय घर की चौखट पर बैठना क्यों है वर्जित। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दहलीज का संबंध माता लक्ष्...

इन तीन प्रकार के भोजन से, मनुष्य की आयु कम होती है।

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नमस्कार प्रिय दर्शकों, धर्म रक्षा channel पर आप सभी का स्वागत है। दर्शकों, इन तीन प्रकार के भोजन से, मनुष्य की आयु कम होती है। इस प्रसंग में एक प्राचीन कथा है, इस कथा के माध्यम से हम आपको बताते हैं, कि मनुष्य को किस प्रकार का भोजन करना चाहिए। भोजन करने का सही तरीका और सही दिशा कौन सी है। भोजन कब करना चाहिए, तथा भोजन करने से पहले क्या बोलना चाहिए। तो दर्शकों यह video बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक होनेवाला है। तो इसे ध्यान से और अंत तक जरूर सुने, और सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। दर्शको, एक बार की बात है, देवर्षि नारद भगवान श्री कृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका नगरी में पधारते हैं। तब भगवान श्रीकृष्ण देवर्षि नारद को देखकर उनका स्वागत करते हुए कहते हैं, आइए देवर्षि द्वारिका में आपका स्वागत है। आज किस प्रयोजन से आप द्वारिका में पधारे हैं। अवश्य ही कोई महत्वपूर्ण समाचार लेकर आए होंगे। तब देवर्षि कहते हैं, हे प्रभु, आप सबकुछ जानते हुए भी पूछ रहे हैं। मैं आज आपके पास मेरी एक शंका का निवारण करने के लिए ही आया है। कृपया आप अपने भक्त की दुविधा को दूर कीजिए। तब श्रीकृष्ण मुस्कुराते हु...

चाहे मर जाना मगर यह तीन बातें स्त्रियों को कभी मत बताना।

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नमस्कार प्रिय दर्शकों, धर्म रक्षा channel पर आप सभी का तहे दिल से स्वागत है। चाहे मर जाना मगर यह तीन बातें स्त्रियों को कभी मत बताना। दर्शकों, आज की इस वीडियो का मकसद है, कि कभी भी इन तीन बातों को स्त्रियों को, या अपनी पत्नियों को कभी नहीं बतानी चाहिए। जो भी पुरुष ये तीन बातें स्त्रियों को बता देता है, हमेशा दुखी रहता है। तो दर्शकों वह कौन सी बातें हैं, जो पुरुषों को मरते दम तक अपनी पत्नी या स्त्री को नहीं बताना चाहिए। ये तीन बातें हम आपको एक छोटी सी कहानी के माध्यम से बताने जा रहे हैं। तो video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुनो। और सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। प्रिय दर्शकों आज की हमारी यह कहानी बहुत ही ज्ञानवर्धक और बहुत ही प्रेरणादायक है, इसलिए आप सभी दर्शकों से आग्रह करते हैं, कि इस कहानी को ध्यान से और अंत तक जरूर सुने। और सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। चाहे मर जाना मगर यह तीन बातों को भूलकर भी मत बताना। दोस्तों, प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक रामगोपाल नाम का एक व्यक्ति रहा करता था। रामगोपाल मन से बहुत ही भोला था, और बहुत ही सीधा साधा था। म...

अष्ट चिंरंजीवी कहानी। सबकी मृत्यु निश्चित है, लेकिनइनकी नहीं, ये 8 अमर हैं

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  अष्ट चिंरंजीवी कहानी। सबकी मृत्यु निश्चित है, लेकिनइनकी नहीं, ये 8 अमर हैं? नमस्कार प्रिय दोस्तों, धर्म रक्षा channel पर आप सभी का स्वागत है। भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है, कि जिस प्राणी ने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु भी निश्चित है। लेकिन, पौराणिक गाथाओं में 8 ऐसे लोगों का ज़िक्र है, जो मृत्यु के बंधन से मुक्त हैं, और कलियुग में भी जीवित हैं। इन्हें सप्त चिरंजीवी कहा जाता है। चिरंजीवी यानी चिर काल तक जीवित रहने वाला। सप्त चिरंजीवियों में, पवनसुत हनुमान, भगवान परशुराम, अश्वत्थामा, कृपाचार्य, व्यास, विभीषण और बलि शामिल हैं। इनके साथ एक और चिरंजीवी हैं, ऋषि मार्कण्डेय। ऋषि मार्कण्डेय अष्टम चिरंजीवी कहे जाते हैं। दोस्तों, यह कहानी बहुत ही रोचक है, तो इस video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुने। और सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। दोस्तों, अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम सप्त चिरंजीवी हैं। इन सात के साथ मार्कण्डेय ऋषि, यानी अष्ट चिरंजीवी के नाम का जाप करने से, व्यक्ति निरोगी रहता है। और लंबी आयु को प्राप्त करता है। जो भी इन चिरंजीवियों...

यमराज कहते है- पत्नी के आलावा इस स्रि के साथ संबंध रखना पाप नहीं होता है।

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 नमस्कार प्रिय दर्शकों, धर्म रक्षा channel पर आप सभी का तहे दिल से स्वागत है। दोस्तों, पत्नी के अलावा इस एक स्त्री से संबंध रखना पाप नहीं होता है। शास्त्रों के अनुसार कोई भी पुरुष पत्नी के अलावा इस एक स्त्री से शारीरिक संबंध बना सकता है। दर्शकों, video को पूरा सुनो तभी कमेंट मे कुछ लिखना है तो लिखो, आधा ज्ञान कुछ काम का नहीं होता है। तो दर्शकों, मेरी एक विनंती है, की video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुनो, और सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। और भी जानकारी के लिए हमारे इंस्टाग्राम, whatsapp channel को फ्री मे जुड सकते है, उसकी Link description मे दी है। दर्शकों, एक बार देवर्षि नारद नारायण नारायण का जाप करते हुए, अंतरिक्ष के मार्ग से यमलोक पहुँच जाते हैं। यमलोक के देवता यमराज विशालकाय सिंहासन पर विराजमान होते हैं, उनके पास चित्रगुप्त बैठे हुए होते हैं। तभी देवर्षि नारद उस स्थान पर पहुंच जाते हैं। देवर्षि नारद को आता देख कर, यमराज उनका स्वागत करते हैं, और उन्हें प्रणाम करते हुए कहने लगते हैं, आपके आगमन से यमपुरी धन्य हुई है। देवर्षि नारद कहते हैं, हे मृत्यु और न्याय के...

भगवान ने की ये गलतियां, इसीलिए भोगने पड़े ऐसे श्राप।

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नमस्कार दोस्तों, भगवान ने की ये गलतियां, इसीलिए भोगने पड़े ऐसे श्राप। आपने अक्सर लोगों को कहते सुना होगा, जैसी प्रभु की माया। क्या सच में सब कुछ भगवान के मुताबिक होता है? क्या उनके पास इतनी शक्ति है, कि वो हमें हर मुसीबत से निकाल सकते हैं ? अगर ऐसा है, तो फिर क्यों भगवान को भी श्राप भोगना पड़ा? तो दोस्तों video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुनो, और सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। दोस्तों, जी हां आपने सही सुना, बहुत से देवी देवता ऐसे हैं, जिन्हें अपने कर्मों के कारण श्राप मिले। और उन्हें भी इनका निर्वाह करना पड़ा । हिन्दू पौराणिक ग्रंथो में कई श्रापों के बारे में बताया गया है। जिनके पीछे कोई न कोई कहानी ज़रूर है, जो हमें सीख देती है। वृंदा का भगवान विष्णु को श्राप। शिवपुराण में भगवान विष्णु को, तुलसी द्वारा दिए गए श्राप के बारे में बताया गया है। जब समुद्र मंथन हुआ तो उस समय, उससे जलंधर नाम के राक्षस का जन्म हुआ। जिसके अत्याचार से सभी देवी देवता परेशान हो गए थे। इस राक्षस की सारी ताकत उसकी पत्नी वृंदा थी। वृंदा भगवान विष्णु की भक्त तो थी ही साथ ही पतिव्रता थी। इसलिए खुद, ...

मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम ने क्यों की, एक स्त्री हत्या ?

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नमस्कार पदोस्तों, मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम ने क्यों की, एक स्त्री हत्या ? मित्रो इस कथा को ध्यान से और अंत तक जरूर सुनो, और सच्चे दिल से कमेंट में जय श्री राम जरूर लिखो। दोस्तों, भगवान श्री राम को मर्यादा पुरूषोत्तम राम भी कहा जाता है। ये नाम उनके सभ्य और मर्यादित व्यवहार के कारण मिला था। लोगों का मानना था कि, श्रीराम कभी कुछ गलत नहीं करते, और ना ही किसी पर अन्याय होने देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, कि मर्यादा पुरूषोत्तन श्री राम ने भी एक मर्यादा उलांघी थी? जी हां , प्रभु राम ने एक स्त्री की हत्या की थी। जबकि ये क्षत्रिय धर्म के खिलाफ था। जिसके मुताबिक कोई योद्धा किसी महिला पर शस्त्र नहीं उठा सकता । इसके बावजूद श्री राम ने एक स्त्री का वध किया। त्रेतायुग में था, राक्षसों का आतंक। रामायण के मुताबिक त्रेतायुग में धरती पर राक्षसों का बहुत आतंक था। वो सबसे ज्यादा ऋषि मुनियों को परेशान करते और मारते थे । तब भगवान विष्णु ने श्री राम के रूप में राजा दशरथ के घर जन्म लिया । कई राक्षषों का वध किया, और कई श्रापित लोगों को मुक्ति भी दिलाई ।जब ऋषि विश्वामित्र अयोध्या के राजकुमारों प्रभु...

एक तोते ने क्यों दिया था माता सीता को भयंकर श्राप।

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 एक तोते ने क्यों दिया था माता सीता को भयंकर श्राप। नमस्कार दर्शकों, आप सभी का धर्म रक्षा channel पर स्वागत है। दर्शकों video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुने, और सच्चे दिल से कमेंट में जय श्री राम जरूर लिखें। दर्शकों, श्री राम और मात सीता ने, 14 वर्ष का वनवास भोग था। माना जाता है, कि जब वनवास के दौरान माता सीता और श्री राम का वियोग एक तोते के श्राप के कारण हुआ था। एक तोते ने माता सीता को भयंकर श्राप दिया था। आइये जानते हैं, इस बारे में। रामायण में कई ऐसे रोचक किस्से मिलते हैं, जो हैरान कर देने वाले हैं। इन्हीं में से एक किस्सा है, माता सीता और एक तोते का। मान्यता है, कि वनवास के दौरान माता सीता और श्री राम के वियोग का कारण, एक तोते का श्राप था, जो उसने माता सीता को दिया था।  रामायण की रचना कई अलग अलग भाषाओं में हुई है। यही कारण है कि, रामयण से जुड़ी कई बातें ऐसी हैं जो हैरान कर देने वाली है।एक भिन्न रामायण में ऐसा उल्लेख मिलता है, कि माता सीता और श्री राम के वियोग के पीछे, एक तोते द्वारा माता सीता को बचपन में मिला श्राप था। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता सीता अपनी बहनों के ...

राम नाम के जाप में कितनी शक्ति है?

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 नमस्कार दोस्तों, राम नाम के जाप में कितनी शक्ति है? राम नाम जपने का क्या महत्त्व है इसमें कितनी शक्ति है ? राम नाम जाप कैसे किया जाता है, इन सभी सवालों का जवाब आपको इस video में मिलने वाला है। तो दोस्तों, video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुनो, और सच्चे दिलसे कमेंट में जय श्री राम जरूर लिखो। दोस्तों, एक महात्माजी रात्रि के समय में श्रीराम नाम का जाप करते हुए, अपनी मस्ती में चले जा रहे थे। जाप करते हुए वे एक गहन जंगल से गुजर रहे थे। विरक्त होने के कारण, वे महात्मा बार बार देशाटन करते रहते थे। वे किसी एक स्थान में अधिक समय नहीं रहते थे। वे ईश्वर नाम प्रेमी थे। इसलिये दिन रात उनके मुख से राम नाम जप चलता रहता था। स्वयं राम नाम का जाप करते, तथा औरों को भी उसी मार्ग पर चलाते थे। महात्माजी गहन जंगल में मार्ग भूल गये थे, पर अपनी मस्ती में चले जा रहे थे, कि जहाँ राम ले चले वहाँ। दूर अँधेरे के बीच में बहुत सी दीपमालाएँ प्रकाशित थीं। महात्माजी उसी दिशा की ओर चलने लगे। निकट पहुँचते ही देखा, कि वटवृक्ष के पास अनेक प्रकार के वाद्ययंत्र बज रहे हैं, नाच गान और शराब की महफ़िल जमी है। कई स्त्री पुर...

पुत्र की इच्छा रखने वाले, यह जानकारी अवश्य सुने।

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 पुत्र की इच्छा रखने वाले, यह जानकारी अवश्य सुने, कहीं बाद में पछताना न पड़े। नमस्कार दोस्तों, धर्म रक्षा channel पर आप सभी का स्वागत है। Video सुरु करनेसे पहले कमेंट मे सच्चे दिल से जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। दोस्तों, महाराजा चित्रकेतु पुत्रहीन थे। महर्षि अंगिरा का उनके यहां आना जाना होता था। जब भी आते थे, राजा उनसे निवेदन करते, महर्षि मैं पुत्रहीन हूं, इतना बड़ा राज्य कौन संभालेगा? कृपा करो एक पुत्र मिल जाए, एक पुत्र हो जाए। ऋषि बहुत देर तक टालते रहे। कहते राजन, पुत्र वाले भी उतने ही दुखी हैं, जितने पुत्रहीन दुखी है। किन्तु पुत्र मोह बहुत प्रबल है। बहुत आग्रह किया, कहा, ‘qठीक है परमेश्वर कृपा करेंगे तेरे ऊपर, पुत्र पैदा होगा। कुछ समय के बाद एक पुत्र पैदा हुआ। थोड़ा ही बड़ा हुआ होगा, कि राजा की दूसरी रानी ने उसे जहर देकर मरवा दिया। राजा चित्रकेतु शोक में डूबे हुए हैं। बाहर नहीं निकल रहे, महर्षि को याद कर रहे हैं। महर्षि बहुत देर तक इसी होनी को टालते रहे, लेकिन होनी भी उतनी प्रबल। संत महात्मा भी होनी को कब तक टालते। आखिर जो भाग्य में होना है, वह होकर रहता है। संत ही है जो टाल सकता ह...

अपने जवान पुत्र को नग्नावस्था में क्यों देखना चाहती थी महाभारत की ये स्त्री।

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नमस्कार दोस्तों, धर्म रक्षा channel पर आप सभी का स्वागत है। अपने जवान पुत्र को नग्नावस्था में क्यों देखना चाहती थी महाभारत की ये स्त्री। जानते है इसके पीछे का अनोखा रहस्य। दोस्तों video सुरु करनेसे पहले सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री राम जरूर लिखें। महाभारत की कुछ ऐसी कहानियां हैं, जिनसे कुछ लोग आज भी अनजान हैं, और उनसे जुड़े रहस्यों का पता लगा पाना मुश्किल है। ऐसे ही कुछ पात्रों का जिक्र भी महाभारत में किया गया है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों में से सबसे प्रमुख है महाभारत। ये ऐसे कई पात्रों के बारे में बताता है, जिनसे आज भी लोगों को प्रेरणा मिलती है। और हममें से कई ऐसे हैं, जो उनकी नीतियों का पालन करते हैं। वहीं महाभारत के कुछ ऐसे पात्र और घटनाएं भी हैं, जो सभी के लिए एक रहस्य हैं। ऐसे ही पात्रों में से महाभारत की एक स्त्री गांधारी का नाम भी लिया जाता है। गांधारी का जीवन महाभारत में कुछ ऐसे रहस्यों के इर्द गिर्द घूमता है, जिनका पता लगा पाना आज भी मुश्किल है। धृतराष्ट्र की पत्नी और कौरवों की मां गांधारी, इस ग्रन्थ में अपनी अनूठी भूमिका और अटूट दृढ़ संकल्प के लिए जानी जाती हैं। वहीं उनका हमेशा...

इन 9 श्रापों के कारण नहीं होती संतान की प्राप्ति, जानिए इनसे बचाव के उपाय सुनो

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नमस्कार दोस्तों, धर्म रक्षा channel पर आप सभी का स्वागत है। इन 9 श्रापों के कारण नहीं होती संतान की प्राप्ति, जानिए इनसे बचाव के उपाय। तो दोस्तों video सुरु करने से पहले सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री कृष्ण जरूर लिखें। कहते हैं कि यदि किसी जातक ने गतजन्म में, अपने पिता के प्रति कोई अपराध किया है, तो उसे इस जन्म मे संतान कष्ट होता है। वैवाहिक बंधन में बंध चुके लोगों की तमन्ना होती है, कि उनके जीवन में खुशियां बरकरार रहे। फिर चाहे वो सुख शांति से जुड़ी हो, या फिर धन संपत्ति से जुड़ी हो। इन्हीं में से एक प्रमुख चीज संतान भी है। जिसके बिना शादी शुदा जीवन और पारिवारिक सुख अधूरा रहता है। लेकिन कई बार लोगों को इस सुख की प्राप्ति बहुत देर से होती है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, वैसे तो कई तरह के श्रा,प या योग बताए गए हैं। जिसके चलते पहले तो संतान नहीं होती है। संतान हो जाती है, तो संतान को कष्ट होता है, या संतान की मृत्यु भी हो सकती है। पराशर संहिता में भी कुछ इसी तरह के श्रापों का वर्णन किया गया है। कहते हैं, कि यदि किसी जातक ने गतजन्म में अपने पिता के प्रति कोई अपराध किया है, तो उसे इस जन्म स...

जानिए क्‍यों और कैसे मनाई जाती है राम नवमी

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 नमस्कार दर्शकों, जानिए क्‍यों और कैसे मनाई जाती है राम नवमी। दोस्तों video सुरु करनेसे पहले सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री राम जरूर लिखें। हिंदू धर्म में रामनवमी का विशेष महत्व है। कहा जाता है, कि इस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति होती है। इस दिन मां दुर्गा और भगवान राम की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। तो चलिए जानते हैं, राम नवमी पर्व का पौराणिक महत्व। रामनवमी का त्योहार बेहद ही खास होता है, क्योंकि इस दिन धरती से पाप का अंत करने, और आदर्श राज्य की परिकल्पना को सच में बदलने के लिए, भगवान श्रीराम ने जन्म लिया था। इस दिन की महिमा इतनी खास है, कि अगर रामवनमी के दिन भगवान श्रीराम का स्मरण और विधि विधान से पूजा पाठ की जाएं, तो सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, त्रेतायुग में धरती से अत्याचारों को खत्म करने, और धर्म की फिर से स्थापना के लिए, भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक में श्री राम के रूप में अवतार लिया। भगवान राम का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन, पुनर्वसु नक्षत्र में और कर्क लग्न में अयोध्या में...