राम नाम के जाप में कितनी शक्ति है?



 नमस्कार दोस्तों, राम नाम के जाप में कितनी शक्ति है? राम नाम जपने का क्या महत्त्व है इसमें कितनी शक्ति है ? राम नाम जाप कैसे किया जाता है, इन सभी सवालों का जवाब आपको इस video में मिलने वाला है। तो दोस्तों, video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुनो, और सच्चे दिलसे कमेंट में जय श्री राम जरूर लिखो। दोस्तों, एक महात्माजी रात्रि के समय में श्रीराम नाम का जाप करते हुए, अपनी मस्ती में चले जा रहे थे। जाप करते हुए वे एक गहन जंगल से गुजर रहे थे। विरक्त होने के कारण, वे महात्मा बार बार देशाटन करते रहते थे। वे किसी एक स्थान में अधिक समय नहीं रहते थे। वे ईश्वर नाम प्रेमी थे। इसलिये दिन रात उनके मुख से राम नाम जप चलता रहता था। स्वयं राम नाम का जाप करते, तथा औरों को भी उसी मार्ग पर चलाते थे। महात्माजी गहन जंगल में मार्ग भूल गये थे, पर अपनी मस्ती में चले जा रहे थे, कि जहाँ राम ले चले वहाँ। दूर अँधेरे के बीच में बहुत सी दीपमालाएँ प्रकाशित थीं। महात्माजी उसी दिशा की ओर चलने लगे। निकट पहुँचते ही देखा, कि वटवृक्ष के पास अनेक प्रकार के वाद्ययंत्र बज रहे हैं, नाच गान और शराब की महफ़िल जमी है। कई स्त्री पुरुष साथ में नाचते कूदते हँसते तथा औरों को हँसा रहे हैं। उन्हें महसूस हुआ, कि वे मनुष्य नहीं प्रेतात्मा हैं। महात्माजी को देखकर एक प्रेत ने उनका हाथ पकड़कर कहा,ओ मनुष्य, हमारे राजा तुझे बुलाते हैं, चल। वे मस्तभाव से राजा के पास गये, जो सिंहासन पर बैठा था। वहाँ राजा के इर्द गिर्द कुछ प्रेत खड़े थे। प्रेतराज ने कहा, तुम इस ओर क्यों आये ? हमारी मंडली आज मदमस्त हुई है, इस बात का तुमने विचार नहीं किया ? तुम्हें मौत का डर नहीं है ? अट्टहास करते हुए महात्माजी बोले, मौत का डर, और मुझे ? राजन, जिसे जीने का मोह हो, उसे मौत का डर होता हैं। हम साधु लोग तो मौत को आनंद का विषय मानते हैं। यह तो देहपरिवर्तन हैं, जो प्रारब्धकर्म के बिना किसी से हो नहीं सकता। प्रेतराज बोलता है तुम जानते हो हम कौन हैं ? महात्माजी बोले, मैं अनुमान करता हूँ कि आप प्रेतात्मा हो। प्रेतराज बाला, तुम जानते हो, लोग समाज हमारे नाम से काँपता हैं। महात्माजी बोलते है, प्रेतराज, मुझे मनुष्य में गिनने की गलती मत करना। हम जिन्दा दिखते हुए भी जीने की इच्छा से रहित, मृततुल्य हैं। यदि जिन्दा मानो तो भी आप हमें मार नहीं सकते। जीवन मरण कर्माधीन हैं। मैं एक प्रश्न पूछ सकता हूँ ? महात्माजी की निर्भयता देखकर प्रेतों के राजा को आश्चर्य हुआ, कि प्रेत का नाम सुनते ही मर जाने वाले मनुष्यों में, एक इतनी निर्भयता से बात कर रहा हैं। सचमुच, ऐसे मनुष्य से बात करने में कोई हर्ज नहीं। प्रेतराज बोला पूछो, क्या प्रश्न है ? महात्माजी बोले, प्रेतराज आज यहाँ आनंदोत्सव क्यों मनाया जा रहा है ? प्रेतराज बोला, मेरी इकलौती कन्या, योग्य पति न मिलने के कारण, अब तक कुँवारी हैं। लेकिन अब योग्य जमाई मिलने की संभावना हैं। कल उसकी शादी हैं, इसलिए यह उत्सव मनाया जा रहा हैं। महात्माजी हँसते हुए बोले, तुम्हारा जमाई कहाँ है ? मैं उसे देखना चाहता हूँ। प्रेतराज बोला, जीने की इच्छा के मोह के त्याग करने वाले महात्मा, अभी तो वह हमारे पद प्रेतयोनी को प्राप्त नहीं हुआ हैं। वह इस जंगल के किनारे एक गाँव के श्रीमंत धनवान का पुत्र है। महादुराचारी होने के कारण वह इस समय भयानक रोग से पीड़ित है। कल संध्या के पहले उसकी मौत होगी। फिर उसकी शादी मेरी कन्या से होगी। इस लिये रात भर गीत नृत्य और मद्यपान करके हम आनंदोत्सव मनायेंगे। महात्माजी वहाँ से विदा होकर, श्रीराम नाम का अजपाजाप करते हुए जंगल के किनारे के गाँव में पहुँचे। उस समय सुबह हो चुकी थी। एक ग्रामीण से महात्मा नें पूछा इस गाँव में कोई श्रीमान् का बेटा बीमार हैं? ग्रामीण बोले हाँ, महाराज नवलशा सेठ का बेटा, सांकलचंद एक वर्ष से रोगग्रस्त हैं। बहुत उपचार किये पर उसका रोग ठीक नहीं होता। महात्माजी नवलशा सेठ के घर पहुँचे, सांकलचंद की हालत गंभीर थी। अन्तिम घड़ियाँ थीं, फिर भी महात्माजी को देखकर माता पिता को आशा की किरण दिखी। उन्होंने महात्मा का स्वागत किया। सेठ पुत्र के पलंग के निकट आकर, महात्माजी रामनाम की माला जपने लगे। दोपहर होते होते लोगों का आना जाना बढ़ने लगा। महात्मा बोले, क्यों, सांकलचंद अब तो ठीक हो ? सांकलचंद ने आँखें खोलते ही अपने सामने एक प्रतापी सन्त को देखा तो रो पड़ा। बोला बाबाजी, आप मेरा अंत सुधारने के लिए पधारे हो। मैंने बहुत पाप किये हैं। भगवान के दरबार में क्या मुँह दिखाऊँगा ? फिर भी आप जैसे सन्त के दर्शन हुए हैं, यह मेरे लिए शुभ संकेत हैं। इतना बोलते ही उसकी साँस फूलने लगी, वह खाँसने लगा। बेटा निराश न हो, भगवान राम पतित पावन है। तेरी यह अन्तिम घड़ी है। अब काल से डरने का कोई कारण नहीं। खूब शांति से चित्तवृत्ति के तमाम वेग को रोककर, श्रीराम नाम के जप में मन को लगा दे। जाप में लग जा। शास्त्र कहते हैं, चरितम् रघुनाथस्य, शतकोटिम् प्रविस्तरम्। एकैकम् अक्षरम् पूण्या, महापातक नाशनम्। अर्थात सौ करोड़ शब्दों में भगवान राम के गुण गाये गये हैं। उसका एक एक अक्षर ब्रह्महत्या आदि महापापों का नाश करने में समर्थ है। दिन ढलते ही सांकलचंद की बीमारी बढ़ने लगी। वैद्य हकीम बुलाये गये। हीरा भस्म आदि कीमती औषधियाँ दी गयीं। किन्तु अंतिम समय आ गया, यह जानकर महात्माजी ने थोड़ा नीचे झुककर उसके कान में रामनाम लेने की याद दिलायी। राम बोलते ही उसके प्राण पखेरू उड़ गये। लोगों ने रोना शुरु कर दिया। शमशान यात्रा की तैयारियाँ होने लगीं। मौका पाकर महात्माजी वहाँ से चल दिये। नदी तट पर आकर स्नान करके, नामस्मरण करते हुए वहाँ से रवाना हुए। शाम ढल चुकी थी। फिर वे मध्यरात्रि के समय जंगल में उसी वटवृक्ष के पास पहुँचे। प्रेत समाज उपस्थित था। प्रेतराज सिंहासन पर हताश होकर बैठे थे। आज गीत, नृत्य, हास्य कुछ न था। चारों ओर करुण आक्रंद हो रहा था, सब प्रेत रो रहे थे। महात्मा ने पूछा प्रेतराज कल तो यहाँ आनंदोत्सव था, आज शोक समुद्र लहरा रहा हैं। क्या कुछ अहित हुआ है? प्रेतराज बोला हाँ, इसीलिए रो रहे हैं। हमारा सत्यानाश हो गया। मेरी बेटी की आज शादी होने वाली थी। अब वह कुँवारी रह जायेगी। महात्मा बोले प्रेतराज, तुम्हारा जमाई तो आज मर गया हैं। फिर तुम्हारी बेटी कुँवारी क्यों रही ? प्रेतराज ने चिढ़कर कहा, तेरे पाप से मैं ही मूर्ख हूँ, कि मैंने कल तुझे सब बता दिया।

 तूने हमारा सत्यानाश कर दिया। महात्मा ने नम्रभाव से कहा, मैंने आपका अहित किया, यह मुझे समझ में नहीं आता। क्षमा करना, मुझे मेरी भूल बताओगे तो मैं दुबारा नहीं करूँगा। प्रेतराज ने जलते हृदय से कहा, यहाँ से जाकर तूने मरने वाले को नाम स्मरण का मार्ग बताया, और अंत समय भी राम नाम कहलवाया। इससे उसका उद्धार हो गया, और मेरी बेटी कुँवारी रह गयी।महात्माजी बोले, क्या, केवल एक बार नाम जप लेने से वह प्रेतयोनि से छूट गया ? आप सच कहते हो ? प्रेतराज बोला हा, जो मनुष्य राम नामजप करता हैं, वह राम नामजप के प्रताप से कभी हमारी योनि को प्राप्त नहीं होता। भगवन्नाम जप में नरकोद्धारिणी शक्ति हैं। प्रेत के द्वारा रामनाम का यह प्रताप सुनकर, महात्माजी प्रेमाश्रु बहाते हुए, भाव समाधि में लीन हो गये। उनकी आँखे खुलीं, तब वहाँ प्रेत समाज नहीं था, बाल सूर्य की सुनहरी किरणें वटवृक्ष को शोभायमान कर रही थीं।दोस्तों, राम नाम जपने का क्या महत्त्व है, इसमें कितनी शक्ति है ? राम नाम की महिमा का गुणगान जितना भी करें उतना ही कम है। क्योंकि राम नाम के दो अक्षर में, ना जाने कितना बल है। राम नाम के सिमरन से धूलता मनका सब मल है। हनुमान जी के दिल में राम सीता विराजते हैं। हनुमान जी से बड़ा भक्त राम के कोई नहीं हुआ। लेकिन हनुमान जी से भी बड़ा भक्त भरत है, जब संजीवनी बूटी लेने के लिए, हनुमान जी गए तो, हनुमान जी ने आकर श्रीराम से बोला, प्रभु आपने मेरे को संजीवनी बूटी लाने के लिए नहीं भेजा था। आपने मेरा अभिमान तोड़ने के लिए मुझे भेजा था। जब मुझे भरत ने तीर मार कर गिराया था, तो मैं गिरा था पर पर्वत नही गिरा था। वो तो आपने संभाला हुआ था, हनुमान जी कहते हैं, कि भरत को तो इतना भरोसा था, आप पर आपके नाम पर। यदि मन वचन और शरीर से श्री राम जी के चरण कमलों में मेरा निष्कपट प्रेम हों। यदि रघुनाथ जी मुझ पर प्रसन्न हों, तो यह वानर थकावट और पीड़ा से रहित हो जाएगा। भरत जी ने तो आपके नाम पर भरोसा किया, और वह तो राम राम कह कर उठ गया। अगर मेरे में इतनी भरोसा होता, तो मैं संजीवनी लेने नहीं जाता। प्रभु यह तो आप की मेरा भ्रम तोड़ने के लिए लीला थी। इसी तरह हम लोग सोचते हैं, कि गृहस्ती हमने संभाल रखी है। बुढ़ापे में बेटा सेवा करेगा या नहीं करेगा, और उसकी चिंता करने लग जाती है। हमें उस राम के नाम पर भरोसा नहीं है, अगर यही राम के नाम पर भरोसा होगा, तो बुढ़ापा भी अच्छे से पार होगा। और राम का नाम भी जपते जपते इंसान परमधाम में जायेगा। राम नाम की महिमा जितनी बखान की जाए, उतनी कम है। क्योंकि राम नाम को जपने से बन जाते सब बिगड़े काम। कहा जाता है, कि राम का नाम, राम से बड़ा है। जहां वह केवल भगवान राम की सेवा और पूजा से प्रसन्न होते हैं। वहीं राम का नाम लेकर हनुमानजी, भगवान राम और देवताओं के भगवान महादेव भी प्रसन्न होते हैं। और उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। आइए जानते हैं, राम नाम के कुछ ऐसे उपयोग, जो आपकी जिंदगी को पूरी तरह बदल देंगे। रोज सुबह सेवा पूजा के बाद तुलसी अथवा रूद्राक्ष की माला से 108 बार राम नाम का जप करें। इससे आपके उपर आने वाले कष्ट ऐसे खत्म हो जाएंगे, जैसे सूर्य की धूप निकलते ही ओस की बूंदे उड़ जाती हैं। बजरंग बली खोल देंगे किस्मत के दरवाजे, जब भी कोई बहुत बड़ी समस्या आ जाए, और कोई उपाय न सुझाई दें। हनुमानजी की पूजा अर्चना करके वहीं आसन पर बैठ जाएं, और राम नाम का जप करते रहें। अगर हर मंगलवार तथा शनिवार को इस प्रयोग को करेंगे तो, जीवन में कभी भी कोई भी कष्ट आपको परेशान नहीं कर पाएगा। धन वर्षा के साथ प्रेम संबंध के भी योग बनेंगे। अगर आपको लगता है, कि घर में किसी तरह की भूत प्रेत बाधा हो, या कोई नकारात्मक शक्ति प्रवेश कर गई हो, तो इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है, कि गंगाजल को राम राम जपते हुए पूरे घर में छिड़क दें। सायं काल पूजा के समय भी, गोबर के उपले छाने पर लौहबान तथा गूग्गल की जलाकर पूरे घर में धूनी दें। इससे तुरंत ही आपकी हर समस्या दूर हो जाएगी। अगर आप सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो पाठ के आरंभ अथवा अंत में एक माला राम नाम के जप भी कर लें। इससे हनुमानजी अत्यन्त प्रसन्न होकर, आपकी हर अभिलाषा पूरी करेंगे। ये भी सुने, इन मंत्रों के प्रयोग से दूर हो जाएगी आपकी हर समस्या। अगर घर के किसी व्यक्ति या बच्चे को नजर लग गई हैं, तो एक इलायची पर 21 बार राम नाम जप कर फूंक मारे, और उसे खिला दें। तुरंत असर दिखाई देगा। मंगलवार को तीन बार राम का नाम लेकर, हनुमानजी के निमित्त बंदरों को गुड़ चने खिलाएं। इससे शनि, राहू, केतु तथा मंगल ग्रहों द्वारा दिए जा रहे सभी प्रकोप तुरंत ही शांत हो जाएंगे, और आपके घर में सुख शांति का वास होगा। तो दोस्तों उम्मिद करता हू की, आपको video पसंद आया होगा। और आप हमारे channel पर नये हो तो, video को like, और channel को subscribe जरूर करे। आपके एक लाईक से ही हमे प्रेरणा मिलती है, और हम मोटिवेट होते है। धन्यवाद। 

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