क्या ओम नाम से पूर्ण मोक्ष मिल सकता है?

  



क्या ओम नाम से पूर्ण मोक्ष मिल सकता है? दर्शकों, पहले यह समझे कि मोक्ष क्या है। तो यह video बहुत ही ज्ञानवर्धक होने वाला है, तो video को ध्यान से और अंत तक जरूर सुने। और सच्चे दिल से कमेंट मे जय श्री राम जरूर लिखें। दर्शकों, मोक्ष यानी, हे प्रभु मुझे छुटकारा दिलाओ, अब मैं नाच्यौ बहुत गोपाल। मैं नही आऊँगा धरती पर, जन्म मरण से मुक्त कराओ। इस का जतन करू, पर कैसे । हिन्दू धर्म इस अंधी गली में घुस गया। किसी को साकेत धाम जाना है, किसी को बैकुण्ठ, किसी को शिव लोक किसी को और कही। ट्रैवल एजेंसी का टिकट चाहिए वो भी एक तरफा। ऐसा भी क्या घबराना। भगवान बुद्ध का सन्देश यही था, निर्वाण। अब कुछ नही बाकी बचा, दिया बुझ गया। कहानी है, एक सन्त ने दिया जला कर पूछा ज्योति कहाँ से आयी। कोई उत्तर नही मिला। एक बच्चा आया, फूंक मार कर बुझा दिया। कहा,जहाँ यह ज्योति चली गई वहाँ से आयी। इस्लाम वाले तो कयामत के बाद जन्नत के ख्वाब से कितनों को भरमा रहे। आतंकवाद फैला दिया। परन्तु हमारे यहाँ तो स्वर्ग के लिए कह दिया। जब तक पूण्य रहेंगे, स्वर्ग मिलेगा, फिर पुनः आना होगा। लोग घबरा गए, मोक्ष ,मोक्ष, रटने लगे। हमे तो वहाँ भेज दो जहाँ से वापस नहीं आना पड़े। अब किसी के पास कोई हिसाब नहीं कि किसका क्या हुआ। कौन गया, कौन आया, बस मन की कल्पनाओं को लेकर सुखी दुखी होते रहो, कयास लगाते रहो। अब वैदिक सनातन परंपरा क्या कहती है। मोक्ष की कल्पना से भ्रमित नहीं होना। यह संसार प्रभु की सुंदर रचना है, आनन्द लो। आने जाने का निर्णय तुम्हारे हाथ नही है। बुद्ध ने तो कह दिया भगवान के हाथ में भी नहीं। और मोक्ष तो तब होगा जब मोक्ष की इच्छा भी नहीं रहे। इस विचारधारा से देश डूब गया। क्योंकि यह हो नही सकता, इसलिये वैदिक सनातन परंपरा सही है। जीवन में जो काम मिले, आनन्द से करो, आनन्द लो।माँ बाप की सेवा, गुरु जनो मित्रों ,समाज ,देश धर्म की सेवा, इसी का नाम कर्म है। गौ सेवा है। इसीलिये बुद्ध शब्द से बुद्धू शब्द बन गया। बुद्धु, मूर्ख मत बनना। जीवन में अच्छे और भले काम जिन्हें सत्कर्मकहा जाता है, यानी जिनसे भगवान भी प्रसन्न होते हैं वो करना। दुनियादारी खराब है तो इसे ठीक करो। दुसरो की भलाई में आनन्द लो। दुनिया की बुराइयां मत करो, खेल खेलो। यही माया का रहस्य है, दुनिया असार है।कोई सार नही, बेकार है, ऐसी बाते नही करनी है। मोक्ष की बाते करने वाले एक प्रकार से अपने माँ बाप को गाली देते हैं। क्यो लाये हमे दुनिया में, ऐसा सोचना पाप है, महा पाप। माँ तुम्हें पाकर कितनी खुश हुई, सोचो, क्यो अपमान करते हो। बुद्ध के तीन सवाल थे, क्या हम बीमार होंगे, क्या हम बूढ़े होंगे, क्या हम मरेंगे। सनातन धर्म का उत्तर है,बीमारों, बूढो, की सेवा करो, भले कर्म करो। मरने के बाद वापस आ जाना। नए कलेवर में। साहिर लुधियानवी का लिखा फ़िल्म चित्र लेखा के गीत संसार से भागे फिरते हो। भगवान को तुम क्या पावोगे सुनने और गुनने की प्रार्थना करता हू। सनातन धर्म के अनुसार, माता पिता या गुरुजनों से यह आज्ञा लेना ही मोक्ष है, कि मैने आपके द्वारा दिये गए सब आदेशों का पालन कर दिया है। सारे कर्तव्य निभा दिये हैं, अब मुझे वचन पालन के बंधन से मुक्त करे। गुरुजी उचित समझते तो सन्यास की आज्ञा कर देते, यही मोक्ष होता। यह नही कि बचपन में ही सब छोड़ छाड़ कर स्वार्थी की तरह जंगल में भाग जाओ। मोक्ष नही, महा पाप मिलेगा। ओम जय जगदीश हरे की आरती का भाव ही हिन्दू धर्म का संविधान है। मात ,पिता, सन्तन की सेवा, श्रद्धा, भक्ति बढ़ाओ। तो दोस्तों उम्मिद करता हू की, आपको video पसंद आया होगा। और आप हमारे channel पर नये हो तो, video को like, और channel को subscribe जरूर करे। आपके एक लाईक से ही हमे प्रेरणा मिलती है, और हम मोटिवेट होते है। धन्यवाद। 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कब किसी भिखारी को राजा बना दें, और कब किसी राजा को भिखारी बना दें कोई नहीं कह सकता।

कैसे दीवाली पर लक्ष्मी पूजा करें?

मृत व्यक्ति के कपड़े और गहने, पहनने चाहिए या नहीं?